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रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में बढ़ती रेल दुर्घटनाएँ: सुरक्षा पर गंभीर सवाल

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में बढ़ती रेल दुर्घटनाएँ: सुरक्षा पर गंभीर सवाल
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में भारतीय रेलवे में बड़े सुधारों की घोषणाएँ की गईं, लेकिन हाल के वर्षों में लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

बड़े रेल हादसे और उनकी भयावहता
बालासोर रेल हादसा (2 जून 2023)
ओडिशा के बालासोर जिले में कोरोमंडल एक्सप्रेस, मालगाड़ी और यशवंतपुर एक्सप्रेस की टक्कर से भयानक दुर्घटना हुई। इस त्रासदी में 290 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 900 से अधिक घायल हो गए। यह भारतीय रेलवे के इतिहास की सबसे भीषण दुर्घटनाओं में से एक रही।

गोंडा रेल हादसा (18 जुलाई 2024)
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से 4 लोगों की मौत हुई और 31 लोग घायल हुए। प्रारंभिक जांच में ट्रैक मेंटेनेंस में लापरवाही की बात सामने आई।

दार्जिलिंग ट्रेन हादसा (17 जून 2024)
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस की टक्कर में 15 यात्रियों की मौत हो गई और 60 से अधिक घायल हुए। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता दुर्घटना की प्रमुख वजह थी।

रेलवे सुरक्षा के गिरते मानक
रेलवे सुरक्षा को लेकर जो सुधार किए जाने थे, वे या तो कागज़ों तक सीमित रह गए या धीमी गति से लागू हो रहे हैं। रेल मंत्री द्वारा 'कवच' सुरक्षा प्रणाली को लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन अधिकांश ट्रेनों में अब तक यह प्रणाली नहीं लगाई गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2021 से जून 2024 के बीच 131 रेल दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 92 मामले ट्रेन पटरी से उतरने के थे। इनमें से 64 पैसेंजर ट्रेनें और 28 मालगाड़ियाँ दुर्घटनाग्रस्त हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेन पटरियों का रखरखाव, आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली और लोको पायलट की ट्रेनिंग में सुधार की जरूरत है।

आलोचना और जवाबदेही का सवाल
लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद, रेलवे मंत्रालय की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। कई मामलों में जांच रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं की जातीं या फिर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती। विपक्ष भी रेलवे सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है और इसे "प्रबंधन की विफलता" करार दे रहा है।

रेलवे मंत्रालय को इन हादसों से सबक लेते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और इस महत्वपूर्ण परिवहन प्रणाली में जनता का विश्वास बना रहे।